छत्तीसगढ़ का जशपुर जिला अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है। इस जिले के मधेश्वर पहाड़ को हाल ही में गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल किया गया है। इसे “लार्जेस्ट नेचुरल फैक्सिमिली ऑफ शिवलिंग” यानी दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग होने का गौरव प्राप्त हुआ है।
मधेश्वर पहाड़ को मिला वर्ल्ड रिकॉर्ड का सम्मान
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए प्रदेशवासियों को बधाई दी और इसे राज्य के लिए गर्व की बात बताया। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को इसका प्रमाण पत्र सौंपा। इस मौके पर कई वरिष्ठ मंत्री भी मौजूद थे।
यह उपलब्धि न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे जशपुर पर्यटन को भी वैश्विक पहचान मिली है। EaseMyTrip जैसी प्रमुख पर्यटन वेबसाइट ने भी जशपुर को अपनी सूची में शामिल कर लिया है, जिससे यहां के पर्यटन स्थलों की जानकारी दुनियाभर के यात्रियों को मिल सकेगी।
मधेश्वर पहाड़: प्रकृति और आस्था का संगम
मधेश्वर पहाड़, जशपुर जिले के कुनकुरी ब्लॉक में मयाली गांव स्थित है। इसकी अद्भुत संरचना शिवलिंग के आकार की है, जिसे स्थानीय लोग भगवान शिव का प्रतिरूप मानते हैं और यहां श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करते हैं।
विशेषताएँ:
✅ शिवलिंग के आकार की विशाल चट्टान
✅ ऊंचाई लगभग 300 मीटर
✅ चारों ओर हरियाली और घने जंगल
✅ 40 से अधिक गांवों से स्पष्ट रूप से दिखाई देता है
✅ बारिश में जलधारा गिरने से शिवलिंग पर ‘टीका’ जैसा प्रतीक बनता है
यह स्थल न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि पर्वतारोहण और रोमांच प्रेमियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है।
पर्यटन को नई पहचान: जशपुर EaseMyTrip में शामिल
हाल ही में EaseMyTrip ने जशपुर जिले को अपने पर्यटन स्थलों की सूची में जोड़ा है। इससे पर्यटकों को जशपुर के सुंदर और पवित्र स्थलों की जानकारी आसानी से मिल सकेगी।
✔️ छत्तीसगढ़ का पहला जिला, जिसे EaseMyTrip पर स्थान मिला
✔️ देशभर से पर्यटक अब आसानी से पहुंच सकेंगे
✔️ धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
यह कदम निश्चित रूप से मधेश्वर पहाड़ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाएगा और छत्तीसगढ़ के पर्यटन उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।

मधेश्वर पहाड़: साहसिक पर्यटन और एडवेंचर स्पोर्ट्स का केंद्र
यह स्थान न केवल श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि एडवेंचर प्रेमियों के लिए भी शानदार अवसर प्रदान करता है।
- पर्वतारोहण (Trekking)
- रॉक क्लाइम्बिंग
- वन्यजीव प्रेमियों के लिए जंगल सफारी
- प्राकृतिक दृश्यों का अद्भुत अनुभव
छत्तीसगढ़ सरकार इसे स्वदेश दर्शन योजना में शामिल कर चुकी है, जिससे इस क्षेत्र का पर्यटन और धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ेगा।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की फोटो में भी दिखा मधेश्वर पहाड़
हाल ही में, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जब छत्तीसगढ़ दौरे पर थीं, तब उन्होंने मुख्यमंत्री निवास में एक ग्रुप फोटो क्लिक करवाई। इस फोटो की खास बात यह थी कि इसके बैकग्राउंड में मधेश्वर पहाड़ दिखाई दे रहा था।
इससे यह साफ होता है कि मधेश्वर पहाड़ अब राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन चुका है।
स्थानीय लोगों की आस्था और पर्यावरण संरक्षण का प्रयास
यह क्षेत्र छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल इलाकों में आता है, और यहां के लोग इस पहाड़ को भगवान शिव का निवास मानते हैं।
✅ हर साल महाशिवरात्रि पर विशेष पूजा और मेले का आयोजन होता है।
✅ स्थानीय ग्रामीण पहाड़ और जंगलों की रक्षा करते हैं।
✅ वन विभाग द्वारा “नेचर पार्क” विकसित किया जा रहा है।
✅ गांववासियों द्वारा वृक्षारोपण कर हरियाली बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है।
निष्कर्ष: जशपुर का गौरव – मधेश्वर पहाड़ शिवलिंग
छत्तीसगढ़ का मधेश्वर पहाड़ अब केवल एक धार्मिक स्थल नहीं रहा, बल्कि यह विश्व स्तर पर प्रसिद्ध हो चुका है। इसके गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल होने से इसका महत्व और भी बढ़ गया है।
यहां की प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक आस्था और पर्यटन के अनगिनत अवसर इसे छत्तीसगढ़ के सबसे बेहतरीन पर्यटन स्थलों में से एक बनाते हैं।
अगर आप भी भगवान शिव के इस अनोखे स्वरूप को देखना चाहते हैं और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेना चाहते हैं, तो मधेश्वर पहाड़, जशपुर आपकी यात्रा सूची में जरूर होना चाहिए!
हर-हर महादेव!
श्री शिव महापुराण कथा l पूज्य पण्डित प्रदीप जी मिश्रा | जशपुर, छत्तीसगढ़ youtube link
जशपुर के मायली में शिव महापुराण, पंडित प्रदीप मिश्रा सुनाएंगे कथा – SHIV MAHAPURAN IN MAYLI
जशपुर में अध्यात्म के क्षेत्र में सबसे बड़डा आयोजन हो रहा है. शुक्रवार से मायली में प्रकृति के करीब शिव महापुराण कथा का आयोजन हो रहा है. यह सात दिनों तक चलेगा. देश के प्रसिद्ध कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा कथा सुनाएंगे. आयोजन से एक दिन पहले प्रदीप मिश्रा मायली पहुंचे. यहां उन्होंने हेलीकॉप्टर से विश्व के सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग की प्रतिकृति मधेश्वर पहाड़ की परिक्रमा की. उसके बाद आयोजन स्थल का निरीक्षण किया.
पंडित प्रदीप मिश्रा पर बरसाए गए फूल: पंडित प्रदीप मिश्रा पर आयोजन कर्ताओं ने फूल बरसाए और उनका भव्य स्वागत किया. आयोजन स्थल पर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं, जहां 55,000 वर्ग फीट क्षेत्र में विशाल पंडाल बनाया गया है.आयोजन स्थल का निरीक्षण करने के बाद पंडित प्रदीप मिश्रा कुनकुरी के लिए रवाना हो गए. प्रदीप मिश्रा ने आयोजन की सारी तैयारियों का जायजा लिया.
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पं. प्रदीप मिश्रा ने कहा कि जो भक्त कैलाश यात्रा (Kailash Yatra) पर नहीं जा सकते, वे जशपुर के मधेश्वर महादेव आकर भगवान शिव की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। यह स्थान अपने धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है।
कैलाश नहीं तो जशपुर के मधेश्वर महादेव जाइए: पं. प्रदीप मिश्रा ने बताया महत्व, यहां सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग